दमोह के पथरिया में कीचड़ में फंसी एंबुलेंस, जच्चा-बच्चा को बीच रास्ते में उतारा, ट्रैक्टर बुलाना पड़ा

 दमोह के पथरिया में कीचड़ में फंसी एंबुलेंस, जच्चा-बच्चा को बीच रास्ते में उतारा, ट्रैक्टर बुलाना पड़ा

बारिश के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में कीचड़ और दलदल के बीच आवाजाही. एंबलेंस नहीं पहुंचने से मरीजों की आफत. 



दमोह : खस्ताहाल सड़कों से संबंधित जनसुनवाई में इतने अधिक मामले आए कि कलेक्टर को आदेश जारी करना पड़ा. इसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से निर्देश दिए कि किसी भी ग्रामीण क्षेत्र में यदि कोई सड़क खराब है तो वहां पर तुरंत मुरम डालकर या प्रस्ताव बनाकर सड़क निर्माण कर आवागमन चालू किया जाए. इसके बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों की हालत बेहद खस्ताहाल है.

महिला मरीज को एंबुलेंस से उतारा


ताजा मामला आनंद विभाग के मंत्री पथरिया के विधायक लखन पटेल के क्षेत्र का है. यहां पर सड़कों की सबसे ज्यादा परेशानी है. इसी जनपद में आने वाले पिपरिया लुहार गांव में सोमवार को एक एंबुलेंस कीचड़ में फंस गई. इसके बाद मरीज को एंबुलेंस से उतार दिया गया और उसे अन्य साधन से गांव तक ले जाया गया. गांव की ही एक महिला की डिलीवरी होनी थी. उसे जिला अस्पताल लाया जाना था. 108 एंबुलेंस को फोन किया गया लेकिन एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी. इसके बाद महिला को पैदल ही आधा रास्ता तय करके एंबुलेंस तक पहुंचाया गया और एंबुलेंस ने महिला को जिला अस्पताल लाकर भर्ती कराया. यहां पर उसकी डिलीवरी हुई.

सोमवार को जब महिला को अस्पताल से छुट्टी मिली तो 108 एंबुलेंस महिला को वापस गांव छोड़ने के लिए जा रही थी. लेकिन मुख्य मार्ग से गांव की सड़क पर प्रवेश करते ही कीचड़ में एंबुलेंस फंस गई और धक्का देने के बाद भी जब नहीं निकली तो महिला को वहीं पर उतार दिया गया. इसके बाद परिजनों ने किसी तरह गांव में ही एक ट्रैक्टर की व्यवस्था की और महिला और उसके नवजात बच्चे को घर तक ले जाया गया.


कई बार गुहार करने के बाद भी सुनवाई नहीं



ग्रामीण आशीष पटेल और गुड्डू पाल ने बताया "पिपरिया लुहार से मुख्य मार्ग की दूरी करी 5 किलोमीटर है. यह पूरा मार्ग कीचड़ में तब्दील है. पूरे बरसात भर यही समस्या रहती है. यदि कोई बीमार पड़ जाए तो उसे ले जाने का कोई साधन नहीं है. बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं. एंबुलेंस रास्ते में फंस गई. इसलिए जच्चा-बच्चा दोनों को ही बीच सड़क पर ही उतरना पड़ा. सरपंच से लेकर सभी अधिकारियों तक बार-बार आवेदन देकर निवेदन किया गया लेकिन सड़क नहीं बन सकी."

बारिश के मौसम में कच्ची सड़क बनी दलदल


गांव की गीताबाई ने बताया "सबसे निवेदन कर लिया लेकिन कोई हल नहीं निकला. चुनाव के समय सिर्फ लोग वोट लेने आते हैं और उसके बाद हम लोगों को भूल जाते हैं. गांव से मुख्य मार्ग तक जाने के लिए केवल यही एक सड़क है और उसमें भी बारिश में कीचड़ और दलदल हो जाता है." 108 एंबुलेंस के पायलट अजय ने बताया "काफी कोशिश की लेकिन एंबुलेंस निकल नहीं पा रही है. कीचड़ में गाड़ी के पूरे टायर फंस गए और आगे नहीं बढ़ पा रही थी. इसलिए मरीज को उतारना पड़ा."


गांव की सरपंच विनीता मुखरैया का कहना है "प्रस्ताव डाला गया है. उम्मीद है सड़क जल्दी बन जाएगी." ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2011-12 में यहां पर सड़क के नाम पर मुरम डाली गई थी. अब 13 -14 साल हो गए हैं. लेकिन तब से अब तक यहां सड़क नहीं बन पाई है. हर साल बारिश में यही समस्या होती है.

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